प्रयागराज: नाम बदला, मुद्दे जस के तस, महंगाई और बेरोजगारी को लेकर भी जनता मुखर
यह प्रयागराज है। अब इलाहबाद न कहिए। पूरे देश की आस्था के केंद्र तीर्थराज में गंगा-यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम की ओर जाते हुए नाव में केवट श्यामधन निषाद ने कुछ इस अंदाज में बदलाव की ओर इशारा किया। उन्होंने कहा कि नाम बदलने से तीर्थ से जुड़े लोग खुश हैं पर मुद्दे जस के तस हैैं। कुंभ के प्रबंधन के बारे में पूछा तो बोले कि कमाल की व्यवस्था थी। सब केवट और निषाद निहाल हो गए। शहर का भी भला हुआ। साथी राजेश केवट ने बताया कि अद्र्धकुंभ भी कुंभ से बड़ा बन गया था। पर सब किया कराया बेकार चला गया। जो कुंभ में कमाया वह कोराना में गंवा दिया गया। कोराना काल की बेरोजगारी जीवन में कभी नहीं भूलेगी। अब सब उधारी में जी रहे हैं। राजनीति अपनी जगह पर पेट की चिंता पहले है। उन्होंने कहा कि अब माघ मेले से उम्मीद है। इस बार कमाई अच्छी हो जाए तो कर्ज उतर जाएं और आगे का रास्ता बने। अभी तो सब अपनी नावों को ठीक करवा रहे हैं ताकि माघ में काम मिल जाए। शहर मेें हनुमन निकेतन चौराहे के पास बने नए सेल्फी पॉंइट आई लव प्रयागराज पर बाहर से आने वाले पर्यटकों की भीड़ थी। फूलपुर से कांग्रेस का नाता अब धुंधला देश के प्रथम...