शुद्ध के लिए युद्ध अभियान है अलवर पूर्व रियासत की देन

अलवर. दीपावली व अन्य कुछ प्रमुख त्योहारों के मौके पर राज्य सरकार खाद्य पदार्थों व मिठाइयों में मिलावट रोकने के लिए शुद्ध के लिए युद्ध अभियान शुरू करें, लेकिन हकीकत यह है कि आज से करीब 90 साल पहले ही अलवर में शुद्ध के लिए युद्ध अभियान की शुरुआत हो गई थी। यानि राज्य सरकार की ओर चलाया जा रहा शुद्ध के लिए युद्ध अभियान एक तरह से अलवर की पूर्व रियासत की ही देन रही है।

अलवर की पूर्व रियासत से जुड़े नरेन्द्रसिंह राठौड़ बताते हैं कि करीब 90 साल पहले अलवर में पूर्व शासक जयसिंह ने न केवल खाद्य पदार्थों में मिलावट रोकने का कानून बनाया, बल्कि उसका सख्ती से पालन भी कराया। पूर्व शासक ने खाद्य पदार्थों में होने वाली मिलावट से आमजन के स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पडऩे की आशंका को लेकर मिलावटी पदार्थों पर पाबंदी लगाने के उद्देश्य से वर्ष 1928 में खाद्य पदार्थों में मिलावट रोकने सम्बन्धी कानून बनाया। यह कानून 15 जुलाई 1928 से रियासत में लागू हुआ और 1930 ई. में इस कानून में संशोधन भी किया गया।

प्रभावी रूप से लागू हुआ कानून

मिलावट को रोकने के लिए बनाए कानून के तहत आमजन के स्वास्थ्य के मद्देनजर इसमें कई प्रावधान भी रखे गए थे। इसमें मिलावटी खाद्य पदार्थों और खासकर वनस्पति व मिलावटी घी से बनी हुई वस्तुओं को रखने और बेचने पर सख्त पाबंदी लगाई गई। इतना ही नहीं मिलावट पाए जाने पर एक्ट की धाराओं के अनुसार कड़े जुर्माने और सजा का प्रावधान किया गया था। पूर्व रियासत में इस कानून के तहत खाद्य पदार्थों में मिलावट की नियमित जांच भी की जाती थी।

शुद्धता और स्वास्थ्य था सर्वोपरि

खाद्य पदार्थों में मिलावट रोकने सम्बन्धी कानून के तहत खाद्य पदार्थों की शुद्धता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती थी। अलवर की पूर्व रियासत में कानून के तहत मिलावट करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाती थी। पूर्व शासक जयसिंह ने आगामी वर्षों में रियासत में चीनी और वनस्पति घी के आयात पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया था। उस दौरान इन प्रयासों का नतीजा रहा कि आमजन को कुछ सीमा तक शुद्ध रूप में घी, अनाज और खाद्य पदार्थ मुहैया हो सके। साथ ही इसमें देशी उद्योग (खांडसारी उद्योग) को भी प्रोत्साहन मिला। यह कानून पूर्व रियासत के दौरान आमजन के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ और आज भी उतना ही प्रासंगिक है। तभी तो सरकार को प्रमुख त्योाहारों पर मिलावट रोकने की याद आती है।



source https://www.patrika.com/alwar-news/alwar-historical-artical-6492624/

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