अलवर से एक कविता रोज: यह कैसी महामारी है, लेखिका- नीतू गुप्ता

यह कैसी महामारी है

'यह कैसी महामारी है,
जो कोरोना का कहर बनकर टूटा है।

प्रकृति भी करवट बदल रही है,
सब कुछ बदल रहा है।

माथे पर चिंता की सलवटें,
अंजाना डर मन में लिए,

आज इंसान, इंसान से दूर हो गया,
आज इंसान नकाबों में रह गया।

बच्चों का खेलना, बड़ों का खुली हवा में घूमना,
सब पर लग गया है विराम।

हे प्रभु!! यह कैसी विपदा आई है,
हर इंसान तेरे दर से भी दूर हुआ है।

हे भगवन! अब तो ऐसी मेहर करो,
अब कोरोना का कहर दूर करो।।

नीतू गुप्ता, अलवर शहर

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source https://www.patrika.com/alwar-news/alwar-se-ek-kavita-roj-ye-kaisi-mahamari-hai-by-neetu-gupta-6457077/

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