जिले में अब 31 जुलाई तक बंद रहेंगे धार्मिक स्थल

अलवर. कोरोना वायरस संक्रमण के चलते जिला प्रशासन ने अलवर जिले में धार्मिक स्थल आगामी 31 जुलाई तक बंद रखने का निर्णय किया है। प्रशासन की ओर से बुधवार को विभिन्न धर्मगुरुओं व जनप्रतिनिधियों के साथ आयोजित बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय किया गया। बैठक में धार्मिक स्थलों को खोले जाने या नहीं खोले जाने को लेकर सुझावों पर चर्चा की गई।

बैठक में जिला कलक्टर ने जनप्रतिनिधियों, धार्मिक गुरुओं, पुजारी, मौलवी, पादरी, ग्रन्थी सहित उपस्थित अन्य लोगों के सुझाव लिए। इस मौके पर गुरूद्वारे के ग्रन्थी ने कहा कि धार्मिक आयोजन वर्चुअल स्थिति में ही ठीक रहेंगे तथा घर से ही प्रसाद वितरण व पूजा-पाठ किया जाना उचित रहेगा। इसी तरह सभी धार्मिक गुरूओं ने जुलाई माह तक धार्मिक स्थल नहीं खोले जाने पर सहमति जताई और कहा कि कानून के डर से सोशल डिस्टेंस की पालना अच्छी तरह से हो पाएगी। जिले में अभी संक्रमण के केस लगातार आ रहे हैं, ऐसी स्थिति में जुलाई माह तक धार्मिक स्थल नहीं खोलना जनता के हित में रहेगा। सभी ने धार्मिक गुरूओं ने सहमति जताई कि धार्मिक स्थल खोले जाने पर एकरूपता बनाए रखना प्रशासन का कार्य है। बैठक में विधायक दीपचंद खैरिया, संजय शर्मा, जौहरीलाल मीणा, सफिया जुबेर ने चर्चा के दौरान अपने सुझाव दिए।

जिला कलक्टर इन्द्रजीत सिंह ने बताया कि धार्मिक गुरुओं व जनप्रतिनिधियों से विचार-विमर्श के बाद जिले में कोविड-19 के संक्रमण की स्थिति को ध्यान में रखते हुए धार्मिक स्थलों को 31 जुलाई तक बन्द रखने का निर्णय किया गया। इस दौरान धार्मिक मान्यताओं से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में अधिकतम 20 व्यक्तियों की उपस्थिति की अनुमति होगी। इन कार्यक्रम को स्थानीय टीवी चैनल, वर्चुअल पर लाइव प्रदर्शित किया जा सकेगा।

विशेष शासन सचिव को अवगत कराया

जिला कलक्टर ने बताया कि 31 जुलाई के बाद धार्मिक स्थलों पर मेडिकल हेल्थ एडवाइजरी के तहत जारी दिशा-निर्देशों की कठोरता से पालना किया जाना आवश्यक होगा। जिला कलक्टर ने धार्मिक गुरुओं व जनप्रतिनिधियों के निर्णय से राजस्थान सरकार के विशेष शासन सचिव को पत्र लिखकर अवगत करा दिया है।



source https://www.patrika.com/alwar-news/alwar-letest-news-6220545/

Comments

Popular posts from this blog

राजस्थान पत्रिका की निःशुल्क भोजन योजना को बताया पूरे प्रदेश में अव्वल, कोरोना पीड़ित और जरूरतमंदों तक पहुंचा रहे भोजन

कभी इनके नाम पर बजती थी तालियां, आज गुमनाम जिंदगी जी रहे कलाकार रिक्शा चलाने और कबाड़ी बनने को मजबूर हैं यह कलाकार

एमबीबीएस डॉक्टरों को रास नहीं आ रही हैल्थ कंसलटेंट की नौकरी